इतिहास के पन्नों से

हिंदुस्तान का वो नेता जो चाहता था भारत हमेशा अंग्रेजी हुकूमत का गुलाम रहे

भारत मे लगभग सारे भारतीय अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ थे और उन्हें अपने देश से उन्हें बाहर निकलने की अथक प्रयास कर रहे थे हम सभी चाहते थे कि हमारे देश से अंग्रेज चले जाएं ताकि हमारे देश की जनता उनके शोषण नीति से मुक्त हो जाये और शोषण नीति से मुक्त करवाने के लिए हमारी धरती माँ ने अपने कई ऐसे लाल खोये है जो इस धरती के लिए अद्वितीय थे और उन्ही के बलिदानों की देन है कि आज हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं ।

लेकिन उस समय हमारे देश मे कुछ ऐसे भी लोग मौजूद थे जो सोचते थे कि अंग्रेजी हुकूमत में रह कर ही हमारा देश विकास कर सकता है। उनका मानना था कि हमे किसी भी राजनैतिक अधिकारों को प्राप्त करने के लिए पहले भारतीयों को उस लायक बनाना होगा जब तक हम उस योग्य नही बन जाते हम अपनी लड़ाई नही लड़ सकते।

ऐसे नेताओं में फिरोज शाह मेहता, आर.सी.दत्त, आनंद चार्लु, एस. एन. बनर्जी,दिनशा वाचा, दादा भाई नौरोजी, व्योमेश चंद्र बनर्जी, बदरुदीन तैय्यब महादेव गोविंद रानाडे और मदन मोहन मालवीय जिन्होंने आजादी के नाम पर सिर्फ कुछ रियायतें मांगी थी । ये लोग जान कल्याण तो करना चाहते थे लेकिन स्वतंत्रता आंदोलन को जनसामान्य का आन्दोलन बनाने के पक्ष में नही थे ।

इनका मानना था कि हम अपनी लड़ाई संवैधानिक तरीके से लड़ सकते है अहिंसक आंदोलन कर देश की जनता को परेशान करने की ज़रूरत नही है। साथ ही उनका ये भी मानना था कि देश का विकास और पुन्रउद्धार अंग्रेजी हुकूमत के संरक्षण में ही हो सकता है जिस कारण इन्होंने अपनी निष्ठा हमेशा अंग्रेजी हुकूमत के प्रति दर्शायी थी।

इस निष्ठा का असर इतना अधिक था कि कोंग्रेस की तीसरे अधिवेशन में बदरुद्दीन तैय्यब ने कहा था कि “महारानी की करोड़ो प्रजा में से उनके इतनी भक्ति किसी ने नही की है जितने की भारतीय शिक्षित लोगों ने की है” ।

और “गोपाल कृष्ण गोखले ने यहां तक कहा था कि आज केवल अंग्रेज ही भारत मे व्यवस्था बनाये रखने में सफल हैं और इस व्यवस्था के बिना विकास संभव नही है” ।इनका मानना था कि अगर अंग्रेज देश से तुरंत चले जायेंगे तो देश मे आराजकत तथा अव्यवस्था फैल जाएगी जो देश की जनता के हित में बिल्कुल नही होगा ।

तो ऐसे लोगों के लिए मैं बस यही कहना चाहता हूँ कि भारत को जिन्होंने आराजकत और अव्यवस्था की धकेल  कर केवल अपनी भला करने वाले हमारे देश मे आराजकत और अव्यवस्था को कैसे दूर कर सकते हैं ।और कही ना कही इन नेताओं ने राजभक्ति दिखने के चक्कर मे ये भुला दिया कि भारत मे गरीबी,भुखमरी और उनके द्वारा किया जा रहा देश का आर्थिक शोषण भारतीय जनता को प्रतिदिन और दरिद्र बनाने का काम किया है।

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Rahul Tiwari
युवा पत्रकार
http://thenationfirst.in

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