कहानी

पुत्र रत्न

क बार ऋषि मेरे घर पधारे ऋषि तो ऋषि होतें है सो उन्होंने बोल दिया तेरे घर बेटा होवेगा लेकिन व संस्कारी + कुसंस्कारी दोनों गुण उन में मौजूद होवेगा बस इतना बोल के वह चुप हो गया !

वह सिर्फ कपड़ो से ऋषि लगता था देखने से तो वह बिलकुल पागल प्रतीत होता था वही जटावाली बिखरी हुई बाल पुरे शरीर गंदगी से भरी हुई लेकिन मुख पे तेज था मै ने तुरंत उनके आगे आसन रखा लेकिन ऋषि बोले “नहीं!!!!!??? वत्स” नहीं !  तेरे जैसा भोगी के घर मै नहीं बैठ सकता तेरे अन्दर इतना कामवासना होते हुए भी तू पुत्रवान नहीं बन सका क्यों ? पता है क्यों ? क्योकि तू पापी है पापी (मुझे तो कुछ क्षण के लिए लगा की ये पागल कहाँ से आ गया! ) तू ने अपना वीर्य पानी की तरह बहाया है उसी का फल तुझे अभी तक मिल रहा है अब तेरी बुढ़ापा आने वाली है फिर भी तेरे घर लाल नहीं है |

बस करो महाराज बहुत उल्टा सीधा बोल लिया आपने ये क्या बोले जा रहे हो आप क्यों मेरा इज्जत उतार रहे हो महाराज !?

हाँ वत्स तुम ने ठीक कहा क्योकि तुझे पूर्व जन्म का अस्मरण नहीं ! क्या मतलब ? तो सुनो तुम आज से 90 वर्ष पहले एक राजा के घर पैदा हुए परंपरा के अनुसार पुरा राज्य तेरा जन्म उत्सव मनाया राजा बहुत खुश था क्योकि तू राजा का प्रथम संतान था राजा प्रेमवीर बहुत खुश हो रहा था दास दासीयों को उपहार पे उपहार बाटें जा रहे थे इसी तरह 18 वर्ष गुजर गए तू 18 वर्ष का जवान हो गया था |

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एक दिन तेरे चाचा का लड़का हमानीसेन तुझे वैश्यालय ले गया वहां तुझे एक मोहिनी नाम की वैश्या से प्रेम हो गया तू उसके प्रेम में इस कदर डूबा की तू दिन रात उसी वैश्यालय में पड़ा रहता उसी मोहिनी के साथ |

एक दिन तू उस वैश्यालय से निकल कर अपने महल जा रहा था कि तुझे एक स्त्री दिखी वह स्त्री सती थी लेकिन उस स्त्री को देख कर तेरा मोहिनी वाला प्रेम जाग गया तुझे उस स्त्री में मोहिनी दिखाई देने लगा और तू ने अपना आपा खो दिया और उस स्त्री का हाथ पकड़ कर आलिंगन कर लिया अब तो उस स्त्री का रूप देखने योग्य था पूरी तरह से चन्डालनी बन चुकी थी आँखे लाल लाल खुले बाल भयानक चेहरा जैसे लग रहा था एक क्षण में तुझे जला कर राख कर देगा

सती स्त्री ने तुझे श्राप दिया कि जा तेरे अन्दर इतनी वासना भरी हुई की तू परस्त्री को भी गन्दी नजरों से देखता है इतनी वासना होने के बाद भी तू जन्मो जन्मों तक पुत्र धन से वंचित रहेगा तू कभी संतान सुख नहीं प्राप्त कर सकेगा इस के कारण तू समाज में मुँह छिपाता फिरेगा हर जगह तुम्हारी बेज्जती होगी |

अब तो तेरे पैर से जमीन खिसक गया तुम्हारा मोहिनी वाला प्यार का भूत एक मिनट में फटक गया तू सीधे जा के उसके पैर पे गिरा त्राहिमाम त्राहिमाम गलती छमा हो हे सती स्त्री मै ने ये सब अपने होसो हवासो में नहीं किया अनजाने में ये बहुत बड़ी गलती हो गयी तू रोने बिलखने लगा

स्त्री तो ममता की मूरत होती है इतना अनुनय विनय रोने विलखने से उस सती स्त्री का दिल पसीज गया और बोली श्राप तो अब मै ने दे दी है उसे वापस तो नहीं ले सकता लेकिन उसे कम कर के मुक्ति दिला सकता हूँ |

अगले जन्म में बहुत वर्ष बाद तेरे घर एक ऋषि आएगा और वह ऋषि जो उपाय बताएगा वह तुम करना फिर तुझे मेरे श्राप से मुक्ति मिलेगी और पुत्र रत्न की प्राप्ति होवेगा !

“भृंग राज” पुत्र अब तुझे जो मै बताता हूँ वह सुनो तुझे कामदेव की उपासना करनी होगी उसके लिए तुझे कामदेव यज्ञ करना होगा और फिर कामदेव प्रसन्न होकर तुम्हे उस सती स्त्री  के श्राप से मुक्ति और पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी | जो आज्ञा ऋषिवर….

***

महाराज- पधारिये महाराज- पधारिये बस आप ही का इंतजार था

हाँ वत्स हाँ तुझे मुक्ति दिलाना मेरा दायित्व है सो तो आना ही होगा | कहो यज्ञ की तैयारी पूरी हो गई |

बस महाराज कुछ काम बचा है अभी पुरा हो जायेगा | ठीक है वत्स तब तक मै एकांत में रहना पसंद करूँगा | जो आज्ञा ऋषिवर !

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यज्ञ पुरा हो चूका था यज्ञ के बीच में ही काम देव प्रसन्न हो गया और वरदान के बदले श्राप दे डाला जा तूने अपनी तरह हमें भी भ्रष्ट करने की कोशिश की है तू ने हमें मांस की आहुति दी है तू ने राक्षसो जैसा व्यावहार किया है जा तुझे राक्षस ही पैदा होगा |

त्राहिमाम त्राहिमाम ये क्या अनर्थ हो गया मै मै में तो सब काम अपनी निगरानी में करवाई थी फिर इस में मांस कहाँ से आया गलती क्षमा महाराज क्षमा महाराज रोना $$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$$…….

माना इसमे तेरी गलती नहीं है तुम्हारी पत्नी की है क्या??????????????????????? क्रमशः

 

“क्या भृंगराज की पत्नी ने आहुति में मांस मिलाया ? क्या भृंग राज को कामदेव के दिए हुए श्राप से मुक्ति मिली या फिर वो ऋषि का किया धरा था ये सब जानने के लिए पढ़िए अगले अंक में”

 

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Pushpam Savarn
A singer, web devloper, video editor, graphics designer, writer and columnist at TNF
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