विचार

किसी भी रेप के लिए लड़कियां ही जिम्मेदार…???

कल मैंने फेसबुक पर एक पोस्ट निर्भया कांड पर सुप्रीम  कोर्ट में हुई सुनवाई को लेकर पढ़ा। दोस्तों सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक लड़की के लिए किस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया गया..  क्या आप जानते हैं ?  आइए हम आपको बताते हैं..

वैसे तो सुप्रीम कोर्ट ने चारो आरोपियों पवन,मुकेश, विनय और अक्षय की फांसी की सजा को बरकरार रखा। लेकिन मुजरिमों के वकील ने क्या दलील थी !  ‘किसी भी रेप के लिए लड़कियां जिम्मेदार होती है’। उन्होंने कहा कि ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती। रेप होने के लिए जितने लड़के जिम्मेदार होते है उससे कई ज्यादा जिम्मेदार लड़कियां होती हैं।

दोस्तो आज हमें अपने नजरिए को बदलने की जरूरत है कि रेप होने में जितना दोषी रेपिस्ट होता है उतना ही जिम्मेदार लड़की होती है।

हमारा समाज वहीं समाज है जिसमें स्त्री को देवी के रूप में पूजा जाता है। हम सदियों से स्त्री को देवी दुर्गा तो कभी माता काली तो कभी माता सरस्वती के रूप में पूजते रहे है। उनको मां का दर्जा दिया हमने। नवरात्रों में धूम धाम से पूजा अर्चना करते है। लेकिन अगर किसी  लड़की के साथ कुछ गलत होता है तो हमारी मानसिकता हमारी सोच ही बदल जाती है। हम साफ फैसला कर देते हैं की इसके साथ जो भी गलत हुआ है उसकी जिम्मेदार वो लड़की खुद है। क्या समाज है हमारा वाह। इसकी तारीफ करने के लिए मेरे पास शब्दों की ही कमी हो जा रही है।

हम सब जानते हैं कि दूसरे देशों में  ऐसे संगीन अपराधों के लिए बीच चौराहे पर फांसी की सजा है।जिसके कारण उन देशों में ऐसे अपराध नहीं होते है। सबसे बड़ा सवाल अब  उठता है कि आखिर इस केस की सुनवाई होने में इतने साल क्यों लगे। सुप्रीम कोर्ट ने जो भी फैसला लिया वो बिल्कुल सही लिया लेकिन इस फैसले को आने में आखिर इतना समय क्यों लगा। इसका आसान सा जवाब ये है कि आज भी हमारे समाज में ऐसे आरोपियों को पनाह देने वाले लोग माजुद हैं। निर्भया कांड को हुए 4 साल बीते गए। इस हादसे से जन्मी क्रांति से तो सरकार बदली आरोपियों के खिलाफ फैसला आया लेकिन नहीं बदला तो आज भी हमारा समाज।

आज भी रेप हो रहे है सासन प्रशासन इस पर रोक लगाने की बात तो कर रहा है लेकिन उस पर कोई सख्त कानून बनाता नजर नहीं आ रहा है। हमारे देश को भी इस जघन्य अपराध के लिए साउदी से कुछ सीख लेनी चाहिए। आखिर और कितनी निर्भया की बलि चढ़ने के बाद उनको इज्जत आबरू लूटने के बाद उनकी जाने जाने के बाद सासन प्रशासन की नींद खुलेगी।

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आखिर कब जागेगा प्रशासन ? एक बड़ा सवाल है। निर्भया ने अपनी अंतिम सांसे लेते हुए अस्पताल में 6 खत लिखे थे। जिसमे उसने अपना दर्द बया किया था। निर्भया ने अपने आखिरी खत में सारे आरोपियों के लिए सजा की मांग किया था। उसने लिखा था कि ‘उन जानवरों को मत छोड़ना’। लेकिन आज भी निर्भया को पूरी तरह न्याय नहीं मिली। नाबालिक होने के कारण मुख्य आरोपी का छोड़ दिया गया। क्या हमारे देश में इस जघन्य अपराध के लिए कोई सख्त कानून नहीं बनना चाहिए।

यूपी में एक और निर्भया कांड

लेकिन वो कब बनेगा ? यह एक बड़ा सवाल है। सपा सरकार रही हो या बीजेपी किसी भी सरकार में हालात बदलने का नाम नहीं ले रहे है। उत्तर प्रदेश के रामपुर में कुछ मनचलों ने एक लड़की से बीच सड़क का छेड़-छाड़ की लेकिन समाज बदलने का नाम नहीं ले रहा सरकार दावे तो लाखो कर रही है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

आखिर हमारे देश में मनचलों पर कब रोक लगेगी। बीच सड़क पर मनचले लड़की को बाहों में उठा ले जा रहे थे लेकिन कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं हुआ। मनचलों ने इसका वीडियो बना फेसबुक पर डाल दिया। योगी सरकार ने आते ही महिला अपराधों में रोक लगाने के लिए एंटी रोमियो दल का गठन किया था। जिसका कुछ दिन तक असर दिखा। अपराधियों में खौफ दिखा लेकिन धीरे धीरे एंटी रोमियो गायब हो गई अब योगी सरकार से ये पूछना लाजमी है कि क्या महिला सुरक्षा का लिया बना एंटी रोमियो दल क्या सिर्फ एक दिखावा था।

दरअसल लड़की अपने दोस्तो के साथ  जा रही थी तभी मनचलों ने लड़की के साथ अपमान जनक हरकते की और उसका वीडियो बना सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। सारे आम ही थी इस दबंगई वाली छेड़छाड़ ने ये साबित कर दिया है कि आरोपियों के अंदर से पुलिस का खौफ पूरी तरह खत्म हो गया है वहीं सरकार के तमाम दावों की पोल खुलती  रही है। अब भी महिला अपराधो को लेकर सरकार की आंखे नहीं खुल रही।आखिर और कितनी लड़कियों को सरकार की नींद खोलने के लिए निर्भया बनना पड़ेगा।

 

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