इतिहास के पन्नों से

कभी हिन्दू मुस्लिम एकता की बात करनें वाला यह व्यक्ति कर दी थी पाकिस्तान बनाने की मांग

भारत एक ऐसा देश है जहां जातिवाद और साम्प्रदायिकता को अगर कोई थोड़ा सा भी हवा दे तो यह आग पूरे कुनबे को खुद में समेटने में ज़रा सा भी देर नही लगाती और इसी आग को भारत की आजादी से पूर्व लगाया गया जिसकी खामियाजा आज तक भारत चुका रहा है और यहां के राजनीतिक दलों को एक ऐसा मंत्र मिल गया जिसका फायदा वे आज तक उठा रहे हैं और शायद भविष्य में भी उठाते ही रहेंगे ।

साम्प्रदायिकता का एक अपना ही अर्थ होता है अगर इस आग को शुरु में ही फैलने से रोक दिया गया होता तो जो आज के भारत मे जगह जगह यह आग जो उठती रहती है शायद वो आग कभी ना उठती लेकिन कहते हैं कि सत्ता का लालच आप को किसी भी चौराहे पर खरा कर सकती है और आप उस चौराहे पे खरा हो कर भी यही सोचते रहेंगे की सत्ता हमारे हाथ कैसे लगे और हम कैसे जातिवाद और साम्प्रदायिकता को हवा दे कर सत्ता रूपी कुर्सी पर हमेशा काबिज रहे।

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एक ऐसा ही व्यक्तित्व वाला व्यक्ति था मोहम्मद जिन्ना जिसने अपनी राजनीति की आगाज तो हिन्दू मुस्लिम एकता से किया पर बाद में उसके ही सुर बदल गए । जिन्ना को हिन्दू मुस्लिम एकता का राजदूत कहा जाता था लेकिन साम्प्रदयिकता की आग में वो खुद अपना हाथ जलने से बचा ना सका और वही व्यक्ति एक अलग देश पाकिस्तान बनाने की मांग करने लगा ।

1916 के बाद जब जिन्ना भारत लौट तो उसके बाद उसने जितनी भी जनसभाएं कीं उनमे वो राष्ट्रीय एकता पर ही बल देता था जिससे सरोजनी नायडू प्रभावित हो कर जिन्ना को हिन्दू मुस्लिम एकता का राजदूत कहा था । लेकिन बाद में कोंग्रेस की ढुलमुल नीतियों ने इसकी नाजायज मांगों को लखनऊ समझौता में मान लिया था तभी से ये साफ हो गया था कि वो मुस्लिम लीग को बराबरी का दर्जा दे कर भारत विभाजन का नीव रखना चाहतें है ।

1941 में जिन्ना के शब्द थे पाकिस्तान ना केवल हासिल किया जा सकता है बल्कि अगर भारत से इस्लाम को पूरी तरह से खत्म होने से रोकना चाहते हैं तो लीग का साथ देना पड़ेगा अन्यथा भारत से हमारा अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा और जिन्ना के द्वारा रोपा गया इस पौधे की जड़ आज इतनें मजबूत हो चुकें है कि शायद भगवान ही इस पौधे को गिरा सके ।

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Rahul Tiwari

युवा पत्रकार

http://thenationfirst.in

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