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बिहार के शिक्षा में नहीं,आपके नजरिए में दोष है

अगर देश के तमाम राज्य एवं केन्द्रीय शिक्षा बोर्ड का गहराई से विश्लेषण करें तो हम पाते हैं कि शिक्षा व्यवस्था हर जगह खामियों से भरी पड़ी है| ना तो हम गुजरात के शिक्षा की तारीफ कर सकते हैं ना हीं यूपी के या फिर सीबीएसई क्यों न हो|लेकिन बात अगर बिहार पर पहुँचती है, तो समूचे देश की नजर घृणा के रूप में बदल जाती है|

जब गड़बड़ियाँ सभी जगहों पर है तो घृणा बिहार से हीं क्यों?… गुजरात में तो सरेआम मोबाईल से चिंटिंग का विडियो सामने आया था, वो भी शिक्षक चयन से संबंधित टेस्ट में|जब वहाँ गुरूजी हीं चिटिंग करते हैं तो बिहार में छात्रों नें चिटिंग करके कौन सा अंटार्कटिका में ग्लेशियर पिघला दिया| बिहार के कद्दावर नेता लालू यादव नें एकबारगी कहा था कि ‘अगर हम चुनाव जीत गए तो स्टूडेंट्स को परीक्षा में किताब ले जाने की अनुमति दे दूँगा’|

अब सवाल उठता है कि जब बिहार की व्यवस्था चिटिंग पर आधारित है, तो सिविल सेवा परीक्षा में बिहारियों का बोलबाला क्यों होता है?… तब जबकि यूपीएससी का एग्जाम तो केंद्र के निगरानी में होता है| लेकिन हाँ, जमीनी स्तर पर काफी खामियां है, जो लगभग सभी राज्यों में है, तो बिहार को बदनाम करना एक घृणित सोंच का हिस्सा नहीं तो और क्या है|

लेकिन हम थोड़ा रूख करते हैं बिहार की शिक्षा व्यवस्था में मौजूद खामियों की तरफ। सवाल उठता है कि अगर यहाँ कि शिक्षा इतनी अच्छी है तो रिजल्ट खराब क्यों आता है? क्यों साइंस इंटरमीडिएट में 60% फेल कर जाते हैं? क्यों आर्ट्स में 70% फेल होते हैं…….अगर हम इसका कारण तलाश करते हैं तो पता चलता है कि इन सबके पीछे नौवीं तक फेल न करने की व्यवस्था दोषी है| किसी भी स्टूडेंट को आप परीक्षा नाम की चिड़िया से सही से परिचय नहीं करा रहे,और एकाएक मैट्रिक की कड़ाई वाली परीक्षा ले लेते हैं|

अब परीक्षा होती नहीं, इसलिए सही से मूल्यांकन नहीं हो पाता और जब मूल्यांकन होगा हीं नहीं तो कौन कितने पानी में है,इसका पता कहाँ से चलेगा| दशकों पूर्व पाँचवी और आठवीं की बोर्ड परीक्षाएँ होती थी तब रिजल्ट के कारण इतनी बदनामी भी नहीं होती थी| इतना  सबकुछ होते हुए अगर कोई स्टूडेंट अच्छी तरह परीक्षा निकाल लेता है तो फिर उस योग्यता की बदौलत अगर वो सिविल सेवा ,बैंक, सेवा क्षेत्र.बिजनेस आदि में नया मुकाम हासिल करे,तो गलत क्या है| मैं डंके की चोट पर कहता हूँ कि बिहार के टेक्स्टबुक का मुकाबला बड़े बड़े बोर्ड नहीं कर पायेंगे|

अगर आप बिहार और बिहारियों की योग्यता को कुछ गलत लोगों के काम के आधार पर तौलते हैं,तो फिर आपको समझाना और पैदल पाकिस्तान जाना बराबर है| अब साधारण अर्थों में देखें,तो किस राज्य में चोर नहीं है,किस राज्य में अराजक तत्व नहीं हैं,किस राज्य में क्राइम नहीं होते| इसका मतलब यह नहीं कि अमुक जगह हीं खराब है या वहाँ के शिक्षा का दोष है| खोट किसी जगह में हो या न हो,आपके नजरिए में जरूर है|

मीडिया के कैमरे तो खोजते हीं है कि मौका मिले और पकड़ लें| एक बड़े से बड़े इंसान की कैमरे के सामने बोलती बंद हो जाती है और आप एक पासआउट से सवाल पर सवाल दागते हैं| कोई भी स्टूडेंट अगर तीन महीना पहले कोई आंसर लिखता है…मानाकि डार्विन का सिद्धांत लिखे या कोई सा पाइथागोरस प्रमेय सिद्ध करे,तरीका और शब्द अलग अलग हो सकते हैं| एक बात और ….बोर्ड की परीक्षा हमेशा लिखित होती है और आप टॉपर से मौखिक सवाल पूछते हैं, फिर प्रचार करते हैं कि बिहार का एजुकेशन सिस्टम हीं खराब है|  अंत में सबका सार यही है….सोंच बदलिए देश बदलेगा,आप भी तरक्की करो दूसरो  को भी करने दो..

 

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Ankush Kumar Ashu

Alrounder, A pure Indian, Young Journalist, Sports lover, Sports and political commentator

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