जरा हट के

मां जैसी दुनिया में कोई भी नहीं

मां जैसी दुनिया में कोई भी नहीं.. मां वो है जिसके कारण कोई भी प्राणी इस दुनिया मे कदम रखता है। मां एक ऐसा शब्द जो हर दुख दर्द में सबसे पहले याद आता है। कहा जाता है कि भगवान भी इस धरती पर मां की आंचल की छांव और ममता के लिए ही आते है। इस दुनियां में जन्म लेने के बाद जब बच्चा पहला शब्द बोलता है वो मां ही है।

माता का संस्कृत मूल मातृ है। हिन्दी में इस शब्द का प्रयोग प्रायः इष्टदेवी को संबोधित करने के लिये किये जाता है, पर सामान्य रूप से माँ शब्द का प्रयोग ज्यादा होता है। मां ममता की मां जैसी दुनिया में कोई भी नहीं देवी होती है। मां जितना प्यार इस दुनिया में कोई दुसरा नही कर सकता है। अगर परिवार में रात को खाना कम हो तो मां वो होती है कि अपने बच्चे को खाना खिला कर खुद भूखे पेट सो जाती है। बच्चे की थोड़ी सी भी तबीयत खराब हो जाए तो मां को रात भर नींद नहीं आती है।

मनुष्य जीवन हो या किसी जीव का  ही जीवन  क्यों  ना हो,  मां का हर किसी के जीवन में बहुत बड़ा महत्व होता है। कहा जाता है कि अगर इस दुनिया में पिता ना हो तो मां  बच्चों का पालन पोषण कर सकती है लेकिन मां ना हो तो पिता बच्चों का पालन पोषण तो कर सकते है लेकिन मां की वो ममता नहीं दे सकते हैं। ये भी कहा जाता है कि भगवान हर जगह नहीं जा सकते जिसके कारण उन्होंने इस दुनिया मां को बनाया।

मां ही सिर्फ एक ऐसी इंसान होती है जो बिना सैलरी के पूरे दिन 24 घंटे खड़े होकर काम करती है। अगर घर में कोई पार्टी या फिर कोई त्यौहार हो तो उस मां को और भी ज्यादा काम करना पड़ता है। हम लोग केवल बैठे बैठे घर में फर्माइस करते रहते है।

एक कहानी  है जो आप सभी ने सुना ही होगा कि एक लड़के को किसी लड़की से प्यार हो जाता है। लड़का उस लड़की से शादी के लिए पुछता है। जिसके लिए लड़की ये सर्त रखती है कि अगर तुम अपने मां का दिल निकाल कर लाओगे तो मैं तुमसे शादी करूंगी। वो पापी जाकर अपने मां की चाकूओं से बेरहमी से हत्या कर दिल निकाल कर अपनी  प्रेमिका को देने कि लिए जाता है। मगर रास्ते में उसको ठेस लगती है और जब वो गिर जाता है तो मां के दिल से आव़ाज आता है कि बेटा तेरे को कहीं चोट तो नहीं लगी। मां का दिल हमेशा सागर की तरह गहरा होता है।

आज के दौर में औलाद बीबी के बातों में आ कर अपनी मां को भूल कर बीबी के गुण गा रहा है। लेकिन फुर्सत के समय जब वो इंसान अकेला होता है। जब उसको कोई परेशानी होती है तो वो इंसान केवल मां ही याद करता है।

दोस्तों हम कभी भी उस देवी के ऋण को उतार तो नहीं सकते, लेकिन इस मदर्स डे पर उस मां रूपी देवी को भगवान से ज्यादा पूज्य उस देवी को आराम देकर और उनकी महानता का सम्मान करें।

 

– हरेराम शर्मा 

114 total views, 2 views today

Facebook Comments
TNF
The Nation First official
http://thenationfirst.in

Leave a Reply