देश

मुफ़्ती साहब! देश को जोड़ने का काम कीजिये, तोड़ने का नही

धर्म एक ऐसा शब्द, जिसे बड़े-बड़े सुरमा भी इस शब्द को सुनने के बाद घुटने टेक देते हैं लेकिन सवाल यही कि कब तक धर्म के नाम पर घुटना टेक राजनीति होती रहेगी और कब तक लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ होता रहेगा ।
अगर कोई मुस्लिम जय श्री राम का नारा लगता है तो उसके खिलाफ फतवा जारी कर दिया जाता है कि उसे मुस्लिम समुदाय से बाहर कर दो, अगर वो व्यक्ति वन्दे मातरम नही बोलता है तो वो द्रोही हो जाता है मुझे ये समझ नही आती कि जो लोग इसका निर्णय करते है कि एक मुस्लिम ने जय श्री राम बोला है तो उसके प्रति फतवा जारी होने चाहिए, उसने वन्दे मातरम नही बोला है तो वो देश द्रोही सिद्ध होने चाहिए मेरा मनना है कि इस तरह के धर्म के ठेकेदारों के लिए और वन्दे मातरम बोलवाने वाले ठेकेदारों के लिए कोई कानून नही है क्या ? या फिर सरकार ने इन्हें लाइसेंस दे दिया है कि जो कोई ऐसा करता है आप लोग ही एक्शन ले कर समाज मे धार्मिक अर्चने पैदा करते रहिए सरकार आप के साथ है ।
मेरा मानना है कि इस तरह के धर्म के ठेकेदारो के लिए ही फतवा जारी क्यों नही कर दिया जाए और वन्दे मातरम बोलवाने वाले टुच्चे नेताओं के लिए ही सबसे पहले देश द्रोह का मुकदमा क्यों नही चलाया जाए ताकि देश और समाज से इस तरह की गंदगी ही खत्म हो जाये
दो दिन पहले की बात है.. जदयू विधायक खुर्शीद आलम ने  महागठबंधन से अलग होने की खुशी में सदन से बाहर निकलते समय उन्होंने जय श्री राम का नारा लगा दिया और उन्होंने ये कह दिया कि राम और रहीम एक है अब इस बात में तो मुझे कोई गरबरी नज़र नही आती जहां तक मेरी समझ जाती है तो खुर्शीद आलम ने ऐसा बोल कर दो अलग धर्मो को जोड़ने की बात कही है लेकिन बेचारे खुर्शीद आलम साहब को क्या पता था कि जय श्री राम बोलना उन्हें भारी पर जाएगा और उनके नाम का फतवा जारी हो जाएगा अगर उन्हें इस बात की ज़रा सी भी इल्म होती तो शायद वो इस धर्म नामक ओखली में अपना सर कभी नही डालते।

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खैर अब तो इस ओखली में अपना सर उन्होंने डाल दिया और इस ओखली से सर निकालने का एक ही रास्ता है कि आप चुपचाप से माफी मांग ले तब जा कर कहीं आपको इस ओखली से आराम मिले।
अब इन लोगो को कैसे समझया जाए कि देश का विकास फतवा और वन्दे मातरम बोलने से नही होता है । हां, एक भारतीय होने के नाते आपको वन्दे मातरम बोलना चाहिए लेकिन किसी के दबाव में आ कर बोलना शायद ये जायज नही है हो सकता है क्योंकि उस व्यक्ति की कोई समस्या रही हो जो नही बोलना चाहता हो लेकिन इसके ठेकेदारो पे कब नकेल कसी जाएगी ताकि ये समाज और देश तोड़ने का काम बंद कर दें । इस तरह के ठेकेदारों से मेरा एक ही विनती है कि देश इन सब बातों से विकास नही करता, देश के विकास में सब की भागीदारी बराबर की होती है चाहे वो किसी भी धर्म से ताल्लुक रखता हो और आप का काम देश जोड़ने का है तोड़ने का नही तो आप अपनी पिछड़ी सोंच को बदलिए और जो आप का काम है वही कीजिये ताकि देश मे एकता बना रहे ।

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Rahul Tiwari

युवा पत्रकार

http://thenationfirst.in

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