जरा हट के

‘कोबरा’ के नाम से मशहुर यह जवान दुश्मनों को गोलियों से नहीं अपने बाजुओं के प्रहार से मारने का शौक रखता था

महावीर चक्र से सम्मानित दिगेंद्र कुमार… एक ऐसा सख्सियत जो भारतीय फ़ौज में शामिल होने के बाद अपने वीरता का परचम कई बार लहरा चुके है.

मजाकिया मिजाज, हरफनमौला अंदाज़ और सबसे घुल मिल के रहने वाले दिगेंद्र की कहानी किसी हॉलीवुड के सुपरस्टार हीरो से कम नहीं. अपने टीम में COBRA के नाम से मशहुर दिगेंद्र, इतने बलवान और हिम्मती थे की जब दुश्मन से इनका बेहद करीबी सामना होता था…तब ये बन्दूक या अपने राइफल से नहीं बल्कि अपने शक्तिशाली बाजुओं के प्रहार से दुश्मन का गला इस प्रकार दबाते थे की दुश्मन छटपटा के वहीँ अपना दम तोड़ देता था. इन्होंने अपने बल, हिम्मत और मजबूत हौसले से अनेको बार भारत माता की रक्षा की है.

1999 की कारगिल युद्ध में जब इनको “पॉइंट 4590 तोलोलिंग हिल”, द्रास सेक्टर, 48 घंटो में पहुँचकर उसे मुक्त कराने का आदेश मिला तब ये अपनी “2nd Battalion Rajputana Rifles” के साथ वहां एक दिन पूर्व ही पहुँच गए और कमान सम्भाल ली. युद्ध के दौरान बुरी तरह से जख्मी हो गए दिगेंद्र को कंधे पर 3 और पेट में एक गोली लग गयी थी जिसके वावजूद ये लड़ते गए और दुश्मनो के बंकरों को तहश-नहश कर आगे बढ़ते गए. इनके हौसले को देख कर बाकि बचे साथियों में भी जोश भर आया और अंततः तोलोलिंग की पहाड़ियों से सारे दुश्मनों को मौत के घात उतारकर इन्होंने वहां तिरंगा फहरा दिया।

जख्मी अवस्था में जब इन्हें और बाकि बचे साथियों को अस्पताल पहुँचाया जा रहा था तब तत्कालीन प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी खुद इनसे मिलने पहुंचे और इनसे कहा:-“वाह दिगेंद्र बेटा, तुम सच में महावीर हो.. तुमने अकेले 48 दुश्मनो को मार गिराया है…” जिसे सुनकर दिगेंद्र खुद चौक पर थे।

महावीर चक्र से सम्मानित होते दिगेंद्र कुमार

15 अगस्त,1999 को इन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया, दिगेंद्र कुमार वाकई में वीरो के वीर थे, हैं और हमेशा रहेंगे।

 

Writer: Ramtanu Mukherjee

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Ramtanu Mukherjee

जिन्दगी हमारा हर पल इम्तेहान लेती है, उससे कभी घबराना मत। अगर मंज़िल सही हो तो हौसले भी बुलंद होने चाहिए। जिंदगी में आगे बढ़ो, पीछे मुड़कर देखने वाला पीछे ही रह जाता है।

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