जरा हट के

लालू के नाम एक बिहारी का खुला ख़त

आशुतोष झा त्रिपुरारी

दरणीय लालू जी,

प्रणाम, मैं जानता हुआ कि आप ये चिट्ठी पढ़ेंगे नही, लेकिन ना जाने किस आशा में लिख रहा हूँ। आजकल आप की मनोदशा कुछ-कुछ लंकापति रावण की उस मनोदशा से मेल खाती हुई लग रही है, जब मेघनाद बध-हुआ होगा। एक पिता के पापों की सजा अगर उसके बच्चे को मिले, तो पिता का दर्द सहज ही महसूस किया जा सकता हैं।

आपने पाप नही घोर पाप किया है। आपने 12 करोड़ बिहारियों के एक पीढ़ी का भविष्य नष्ट कर दिया। उन्हें अपने देश में ही शरणार्थी बना दिया। जब 90 के दशक की नई आर्थिक नीति के दौर में में बैंगलोर सिलिकन वैली, हैदराबाद साइबराबाद और गुड़गांव मिलेनियम सिटी बन रहा था , आप चरवाहा विद्यालय खोल रहे थे। जो बिहार भारत को बेहतरीन प्रतिभा दिया करता था, उसे आपने मंडल कमिशन का आखाड़ा बना दिया। 15 साल के शासन मे बिहार की शिक्षा और स्वास्थ्य को गर्त में डाल दिया।

आप जीतते रहे, ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार और लाला को गाली देकर, लेकिन आप जिनके नेता होने का दम्भ भरते रहे, उनको कहीं का नही छोड़ा। खेतिहर किसान को शहरी मजदूर बना दिया आपने। कभी आइये नोएडा और गुड़गांव, जिसके सम्मान की लड़ाई आप लड़ने का नाटक करते रहे, वो किस अपमान में जी रहे है।

लालूजी आपने गरीबी देखी थी, आप तो मर्म समझ ही सकते थे। कितना पैसा चाहिए अच्छी जिंदगी जीने के लिए…एक गरीब का बेटा करोड़ों गरीबों का हिस्सा मार गया।

अब एक ही रास्ता बचा है, प्रायश्चित का। छोड़िये अमित शाह और मोदी को , कोर्ट में आफ़िडिफिट दीजिये , सबूत के साथ, की सारे मामले में मुझे आरोपी बनाया जाए, बिहार का भविष्य तो बचा नही पाए, बच्चे का भविष्य बचा लीजिये। तेजस्वी यादव की गलती बस इतनी है कि वो आपका बेटा है। यदुवंशी कृष्ण भी है, और कंश भी, रास्ता आपको चुनना था।

आपके दीर्घायु के कामना के साथ,

आपके राज्य का निवासी।

  आशुतोष झा त्रिपुरारी 

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