इतिहास के पन्नों से राजनीति

लालू के पार्टी से निकाला गया यह व्यक्ति 3 बार रह चुका है कर्नाटक का मुख्यमंत्री

5 जुलाई 1997 को जन्मी पार्टी आरजेडी एक तरफ अपनी   21वीं वर्षगांठ के जस्न मे डूबी  है तो दुसरी तरफ लोग उन्हें याद कर रहे हैं जिन्होंने पार्टी का नामकरण किया था । जी हां मैं बात कर रहा हुं आरजेडी के नेता रामकृष्ण हेगरे की  । जब जनता दल से अलग हो कर आरजेडी का गठन हुआ था तब पार्टी के अंदर पार्टी के नाम को लेकर लालू यादव और उनके नेताओं के बीच संशय बनी हुई थी कि पार्टी का नाम क्या रखा जाए और तब रामकृष्ण हेगरे ने राष्ट्रीय जनता दल नाम सुझाया था ।

जिसे पार्टी के वरिष्ठ नेता से लेकर कार्यकर्ता तक ने इस नाम पर अपनी सहमती जताई  थी और इस नाम पर मुहर लगा दिया गया  और लालू प्रसाद यादव को पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया । लेकिन जिसने पार्टी के नामकरण मे अहम भूमिका निभाया लालू यादव ने उसे ही पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया हांलाकि पार्टी के 21 वर्षगांठ पर लालू यादव ने अपनी गलती को स्वीकारते हुए कहा कि उनसे गलती हुई है  राम कृष्ण हेगरे को पार्टी से बाहर नही निकालना चाहिए  था ।

रामकृष्ण हेगरे का राजनीतिक जीवन

रामकृष्ण हेगरे का जन्म उत्तरा कनाडा के सिद्धपुरा मे 29 अगस्त 1926 को हुआ था और इन्होंने महात्मा गांधी काशी विध्यापीठ से शिक्षा ग्रहण किया और कर्नाटक के 3 बार मुख्यमंत्री रहे । उन्होंने कर्नाटक से बतौर MLA 1957, 1962, 1967, 1983, 1985 और 1989 तक कार्य किया उसके बाद राज्यसभा सदस्य के  रुप मे 1978 से 83 और 1996 से 2002 तक मनोनीत किया गया । इन्होंने अपना राजनैतिक जीवन जनता दल से शुरु किया और बाद में लोक दल के नेता भी रहे ।

तो एक प्रभावशाली व्यक्तित्व वाल व्यक्ति अगर आरजेडी खेमे के नेता  होते तो शायद आरजेडी के हालात कुछ और होती और शायद लालू प्रसाद यादव को अपने गलती का ऐहशास करने की जरुरत ही नही होती और अतने ग्रह-गोचर को भी कोशने की जरुरत ना परती । चुकि किसी भी व्यक्ती या पार्टी की पहचान उसकी नाम से ही होता है और नामकरण करने वाला व्यक्ती भी कोइ आम व्यक्ति नही होता है ।

 

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Rahul Tiwari

युवा पत्रकार

http://thenationfirst.in

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