जुर्म

वह अपराधी था, भीड़ नें उसके साथ हैवानियत की हदें पार कर दी

वह लगभग 26-27 साल का नौजवान था…उसे बंदूक और लाठी से काफी लगाव रहता..बात बात में पिस्टल लहराना उसे पसंद तो था हीं, आन बान और शान से भी कभी समझौता नहीं करता था..जो उसके रास्ते में आता उसे वह टपका देता था…इसलिए वह एक खूँखार क्रिमिनल था, जिसकी पहुँच बड़े आपराधिक संगठनों से थी।

अपराध जगत में पैर अभी पूरी तरह से जमा नहीं था, लगभग पाँच साल हीं हुए थे, लेकिन फिर भी इलाके के लोग उससे डरते थें।  बुद्धि का कम इस्तेमाल और जोश पर कुछ भी कर गुजरना उसकी कमजोरी थी..ऐसी कमजोरी जो उसे किसी भी दिन इस दुनिया से विदा करने के लिए काफी थी, फिर भी ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’, उसे कुछ समझ में नहीं आता|

उस शख्स का नाम था रामानुज शाही जो मुजफ्फरपुर के सरैंया प्रखंड के हरिहरपुर का रहनेवाला था| कल प्रखण्ड के हीं बहिलवारा में गाँववालों नें उसे पीट पीटकर मौत के घाट उतार दिया| पुलिस पिछले एक महीनें से उसकी तलाश कर रही  थी ।

बिहार पुलिस की तेजी से तो सब अच्छी तरह परिचित हैं, बिल्कुल कछुए जैसी तेजी। पुलिस इतनी तेजी दिखाए,तो ग्रामीणों को मैटर अपने हाथ में लेना आम बात है| जिस वक्त भीड़ उसे पीटकर मौत के घाट उतार रही थी,पुलिस भाग खड़ी हुई थी| वह एक अपराधी था लेकिन जिस तरह से भीड़ नें हैवान बनकर उसे मारा,वह न केवल उस भीड़ पर,बल्कि प्रशासन और उसके कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

लगभग डेढ़ महीनें पहले बारात में गोलीबारी से लेकर अगले हीं दिन दो महादलित महिलाओं को गोली मारने बाद से वह आसपास के इलाकों में चर्चा के केंद्र में रहा| ३० जुलाई के शाम को एक कोचिंग संचालक से रघुनाथपुर ग्राम में विवाद हुआ जिसके बाद शाही नें उसे पेट में दो गोली मार दी| विवाद के दो कारण चर्चा में थे एक,अवैध संबंध,जो लगभग  70% हत्याओं का जड़ है, दूसरा जो ज्यादा वजनदार है,मनरेगा में ठेकेदारी का मैटर….जिस शख्स को रामानुज नें गोली मारी, वह पंचायत के उपमुखिया का इकलौता बेटा था|इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई|

आरोपी रामानुज वहाँ से भागनें के बाद पूरी रात आसपास के गाँव में अपने मैक्सिमो गाड़ी से चक्कर काटता रहा| सुबह वह अपने घर पहुँचा जहाँ वह अपने बीवी बच्चे को घर में बंद कर फिर गाड़ी लेकर निकल पड़ा| लगभग दस मिनट बाद उसके घर पहुँची जैंतपुर पुलिस घर बंद देखकर बैरंग लौट गई|

फिर कहीं से सूचना प्राप्त हुई कि वह पोखरैरा की तरफ भागा है,पुलिस गाड़ी के टायर के निशान पर उसका पीछा करने लगी| रामानुज अपने साथी रंजीत साह के साथ छितरी बाजार से सोलिंग रोड पकड़ा जो किसी के दरवाजे पर समाप्त होती थी| अपने पास कोई चारा न देखकर दोनों दो रास्ते चौर की तरफ भागने लगे, जहाँ गाँव वालों नें पीछा शुरू कर दिया..सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण रामानुज का पीछा कर रहे थे| इसबीच उसका साथी ग्रामीणों के हत्थे चढ़ गया, गाँववाले उसको मारने पर आमादा थे लेकिन पुलिस नें जैसे तैसे उसे लेकर भागनें में कामयाबी पाई|

जैंतपुर पुलिस वहाँ से भाग चुकी थी,लेकिन वायरलैस पर उसनें आसपास के थानों को सूचित कर दिया था| दबिश बढ़ते देख रामानुज नें फायर करना शुरू कर दिया| पुलिस पर भी फायरिंग कि जिसमें जैंतपुर के दारोगा बाल बाल बच गये| लेकिन उसकी एक गोली गाँव के एक युवक को लग गई| अब गाँव वालों का गुस्सा सातवें आसमान पर था| कुछ ऐसा होनें वाला था जिसकी कल्पना कोई इंसान नही कर सकता| भीड़ कानून अपने हाथ में ले रही थी, और प्रशासन ग्रामीणों के आक्रोश के आगे भाग गई थी|

रामानुज शाही भीड़ से विनती कर रहा था कि उसका उनसे कोई दुश्मनी नहीं है फिर क्यों पकड़ रहे हो, लेकिन भीड़ उग्र थी| आमतौर पर वारदात के बाद अपराधी कुछ दिनों तक छुप जाता है लेकिन उसकी मौत लगातार उसे पुकार रही थी| उसके साथी नें उससे सरेंडर करने को भी कहा था लेकिन उसने एक न सुनी| भीड़ नें हैवानियत की सारी हदें पार कर दी|

वे चाहते तो उसे पकड़ कर पुलिस के हवाले किया जा सकता था लेकिन शायद लोगों को प्रशासन पर तनिक भी विश्वास नहीं था| हो भी क्यों,जब पुलिस मौका ए वारदात से भाग निकले| कोई कितना बड़ा अपराधी क्यों न हो लेकिन भीड़ को मृत्युदंड देनें का हक आखिर किसने दिया| कानून वाकई में फेल हो चुका है या भीड़ की दबंगई है ये| अफसोस यह तब हो रहा था जब हजार किमी दूर संसद में   भीड़ की हैवानियत पर लगाम लगानें के तरीकों पर बहस हो रही थी| इस घटना नें राजधानी तक हलचल पैदा कर दी| लेकिन अब सवाल यह है कि क्या कोर्ट की जरूरत खत्म हो गई है|

जब उसे पीटकर मारा जा रहा था, किसी नें दस सेंकेंड का विडियो बना दिया जो वायरल हो गया| विडियों में साफ साफ दिख रहा है कि एक आदमी कुदाल के उल्टे साइड से उसके मुँह पर वार किए जा रहा है, और बाकी लोग उसे उकसा रहे हैं|

सूत्रों से यह बात पता चली कि जैंतपुर थानाध्यक्ष के पास रिवाल्वर तक नहीं था और उनके साथ जो जवान थे, वो धीमा दौड़नें में स्वर्ण पदक जीतनें के प्रबल दावेदार थें| प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने का हरसंभव प्रयास कर रही है लेकिन बड़ी चूक हुई है तो जवाब देना हीं होगा| साथ हीं गिरफ्तार आरोपी नें पूछताछ में कई बड़े खुलासे किए भी हैं, आनेवाले वाले समय में और कुछ बड़े रहस्य पर से पर्दा उठा सकता है| रामानुज शाही की पृष्ठभूमि आपराधिक रही है|

उसके पिता रिपु शाही लगभग एक महीनें से जेल में बंद हैं| वह भी डेढ़ दो महीनें पहले जेल से छूटकर आया  था| उसने दो शादियाँ की जिसमें पहली पत्नी को उसनें छोड़ दिया था,दूसरी शादी अपनी प्रेमिका से की| उसके तीन बच्चे हैं जो अब अनाथ हो चुके हैं|

क्या बिहार की पुलिस इतनी कमजोर है कि फैसला भीड़ ले रही है?  भीड़ को यह हक किसनें दिया कि वह किसी की भी जान ले ले,चाहे वह क्रिमिनल हीं क्यों न हो? क्या प्रशासन उस भीड़ में शामिल लोगों पर कार्रवाई करेगी? किसी को जान से मारना एक क्राइम है,फिर मारनें वाले पर भी केस चलना चाहिए ?  ये तमाम बिंदु है  जिसका जवाब हर किसी को चाहिए होगा, भावनाएँ अपनी जगह और हकीकत अपनी जगह…

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Ankush Kumar Ashu
Alrounder, A pure Indian, Young Journalist, Sports lover, Sports and political commentator
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