जरा हट के

‘कोबरा’ के नाम से मशहुर यह जवान दुश्मनों को गोलियों से नहीं अपने बाजुओं के प्रहार से मारने का शौक रखता था

महावीर चक्र से सम्मानित दिगेंद्र कुमार… एक ऐसा सख्सियत जो भारतीय फ़ौज में शामिल होने के बाद अपने वीरता का परचम कई बार लहरा चुके है. मजाकिया मिजाज, हरफनमौला अंदाज़ और सबसे घुल मिल के रहने वाले दिगेंद्र की कहानी किसी हॉलीवुड के सुपरस्टार हीरो से कम नहीं. अपने टीम में COBRA के नाम से […]

जरा हट के

लालू के नाम एक बिहारी का खुला ख़त

आदरणीय लालू जी, प्रणाम, मैं जानता हुआ कि आप ये चिट्ठी पढ़ेंगे नही, लेकिन ना जाने किस आशा में लिख रहा हूँ। आजकल आप की मनोदशा कुछ-कुछ लंकापति रावण की उस मनोदशा से मेल खाती हुई लग रही है, जब मेघनाद बध-हुआ होगा। एक पिता के पापों की सजा अगर उसके बच्चे को मिले, तो […]

जरा हट के

पापा मेरे पापा….

डैड्स… पापाज़.. बाबाज़.. शब्द अनेक हैं लेकिन रिश्ता एक ही.. पापा। पापा के बारे में मैं क्या बोलू .. लड़कियों की पहली मोहब्बत है पापा, लड़कों के पहले दोस्त हैं पापा.. मम्मी की डांट से बचाने वाले हैं पापा, हमारे हर सपने को पूरा करने वाले हैं पापा, हमारे एफर्ट्स को एप्रिशिएट करने वाले हैं […]

जरा हट के

मां जैसी दुनिया में कोई भी नहीं

मां जैसी दुनिया में कोई भी नहीं.. मां वो है जिसके कारण कोई भी प्राणी इस दुनिया मे कदम रखता है। मां एक ऐसा शब्द जो हर दुख दर्द में सबसे पहले याद आता है। कहा जाता है कि भगवान भी इस धरती पर मां की आंचल की छांव और ममता के लिए ही आते […]

जरा हट के

मेरे पास माँ है!

ये डायलॉग ‘मेरे पास माँ है’ तो सुना ही होगा आपने . फ़िल्म दीवार की ये बहुत फेमस डायलॉग है जो शशि कपूर द्वारा बोला गया है जब अमिताभ बच्चन पैसे के नशे में चूर शशि कपूर से पूछते हैं मेरे पास बंगला है,गाड़ी है, बैंक बैलेन्स है.. तेरे पास क्या है ? तभी शशि […]

जरा हट के

अटल जी के दोस्त उन्हें इस अजीबोगरीब नाम से बुलाते थे

भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक और हर दिल अजीज़ पंडित अटल बिहारी वाजपेयी उन चंद भारतीय राजनेताओं में गिने जाते हैं जिनका सम्मान विपक्ष भी करता है। अटल जी अपने विनम्र स्वभाव के कारण हर दिल प्रिय हैं और यही उनकी विनम्रता थी जो भारतीय जनता पार्टी को उनके लीडरशीप में […]

जरा हट के मनोरंजन

समाजिक कुरीतियों पर चोट है फ़िल्म ‘आत्मग्लानी’

अनुज कुमार रॉय द्वारा निर्देशित शॉर्ट फिल्म आत्मग्लानी की कहानी अस्सी के दशक की है इस फिल्म में उन पुरानी कुरीतियों को दिखाया गया है जो कुरीति 21वीं सदी आने के बाद भी लोगों के रग-रग में बसा हुआ है और इस कुरीति से उबरने के लिए कोई आवाज़ तक नहीं उठाता.. चलो जो आमीर […]