देश विचार

बातें मत हांकिए अपनी सोंच बदलिए साहब

भारतीय समाज एक ऐसा समाज है जहां महिलाओं को आदि-काल से ही अपने घर की लक्ष्मी के रुप मे देखा जाता है और कभी दुर्गा के रुप मे तो कभी सरस्वती के रुप मे उसकी पुजा की जाती है , संस्कृत मे एक श्लोक  है ‘यस्य पुज्यंते नार्यस्तु तत्र रमंते देवता:’ जिसका अर्थ है जहां नारी की पुजा की जाती है वहां देवता निवास करते है ।

लेकिन वर्तमान समय में ठीक इसके विपरीत हो रहा है। नारी को अपनी जरुरत के हिसाब से इस्तेमाल किया जा रहा है अगर आम शब्दों मे कहें तो स्त्री को आज उपभोग मात्र की दृष्टि से देखा जाता है और यह केवल आज की बात नहीं है बल्कि आदिकाल मे भी महिलाओं को अनेक यातनाओं से गुजरना पड़ता था ।

यह भी पढ़ेरो परी थीं मां

कहा जाता है कि एक महिला ही समाज की  दर्पन होतीं है और साथ ही यह भी कहा जाता है कि जब एक महिला शिक्षीत होती है तो आने वाले सात पीढ़ी को शिक्षीत करती है लेकिन वर्तमान समय मे महिलाएं खुद को हर कदम पर असुरक्षित महसुस करती हैं इस समस्या के पीछे सिर्फ समाजिक कारण नही है बल्कि पारिवारिक कारण भी सक्रिय है क्योंकि प्रतिदिन महिला किसी न किसी रुप मे प्रताड़ित होती हैं कभी अपने ही घर मे दहेज के नाम पर उसे जला कर मार दिया जाता है  तो कभी सरेअम सड़कों पर मनचलों के द्वारा उन्हें छेड़ा जाता है तो कभी  उसे प्रेम का प्रलोभन देकर उसकी आबरू को तार-तार कर दिया जाता हैं वो भी महज इस लिए कि व्यक्ति अपने जीस्म की भुख को मिटा सकें ।

यहां पढ़ेमेरे पास माँ है!

आंकड़ो की बात करे तो भारत मे प्रति 54 मिनट मे 1 महिला का बलात्कार किया जाता है आर्थात महीने मे 800 और एक वर्ष मे 9600 महिलाओं का बालात्कार किया जाता है अर्थात व्यक्ति लक्ष्मी रुपी महिलाओ के साथ वर्ष भर मे 9600 सौ बार बालात्कार  करता है और फिर भी हम कहते है कि स्त्री  लक्ष्मी की रुप है  ऐसे समाज को  किस उपाधि से बुलाना चाहिए शायद मैं नही जानता या यूं कहें कि हमारे पास ऐसे समाज के लिए कोई शब्द ही नहीं है । अगर एक और विडंबना की बात करें तो हमारे समाज  मे सबसे बड़ी विडंबना है कि यहां पत्नी और गर्लफ्रेंड हर किसी को चाहिए लेकिन बेटी शायद ही किसी को चाहिए ऐसे लोगों से मेरा एक ही सवाल है कि आप की जन्मदात्री भी एक महिला हीं है और वो भी किसी की बेटी ही है तो फिर ये जानते हुए भी आप किस हक से बेटी नहीं चाहते जो समाज की निर्माणक होती है ।

मैं इस तरह के व्यक्तित्व वाले व्यक्ति से यही आग्रह करना चाहुंगा कि आप अपना सोंच बदलिए तभी देश बदलेगा क्योंकि देश निर्माण ने उतना ही भागीदारी महिलाओं की होती है जितनी की पुरुषों का ।

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Rahul Tiwari
युवा पत्रकार
http://thenationfirst.in

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