इतिहास के पन्नों से

और यहीं से उठने लगा था पाकिस्तान बनाने की आग

भारत मे अंग्रेज आए तो थे व्यापारी बनकर लेकिन देखते ही देखते भारत को कब उन्होंने अपने अधीन कर लिय़ा पता ही नही चला और समय के साथ वो अपना पैर पसारते चले गए इसके पीछे इनकी एक नीति जो रामवाण की तरह था वो था फुट डालो राज करो की नीति । उस समय एक ऐसा दौड़ था जब ये काम उनके लिए आसान नहीं था जिसका मुख्य वजह था भारतीय राजाओं का आपसी मतभेद और इस मतभेद के कारण ही उनकी ये नीति हर कदम  पहला विभाजित प्रदेश बना बंगाल ।

कहा जाता है कि यह विभाजन इस लिए किया गया था ताकि राष्ट्रीय एकता को तोड़ा जा सके और इस राष्ट्रीय एकता को तोड़ने का जिम्मेदारी लार्ड कर्जन को सौंपा गया था और कर्जन ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया भी था । कर्जन ने पहली बार बंग-भंग की घोषणा सार्वजनीक रुप से 1903 मे किया और इसके पीछे उसका तर्क था कि बंगाल भारत के सभी प्रेसिडेंसीयों से काफी बड़ी है जिस कारण सरकार चलाने मे परेसानीयों का सामना करना पर रहा है आप को बता दें कि उस समय इस प्रेसिडेंसी मे बिहार और उड़ीसा भी शामिल था ।

लेकिन मेरा मानना है कि ये केवल एक बहाना था बंगाल को तोडने का वास्विकता तो ये थी की बंगाल मे कई ऐसे स्वतंत्रता सेनानी थे  जो एक जुट होकर भारत के लिए आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे या यू कहें कि उस समय लगभग सम्पूर्ण बंगाल एक जूट हो कर इस लड़ाई को लड़ रहा था और इसी एक जुट शक्ति को तोड़ने के लिए बंगाल का विभाजन किया गया और एक बार फिर उनकी फुट डालो राज करो की नीति सफल हुई और 20 जुलाई 1905 को बंगाल विभाजन की घोषणा कर दिया गया ।

इस नीति का सफल होने का एक और वजह है धर्म और जहां ये शब्द आ जाए वहां कुछ भी सम्भव है उस वक्त बंगाल की कुल जनसंख्या थी 8 करोड़ 50 लाख इस आबादी को बांट कर पूर्वी और पश्चिमी बंगाल बना दिया गया । चूंकि यह विभाजन धर्म के नाम पर किया था इस लिए पश्चिमी बंगाल मे अधिक जनसंख्या हिंदूओं की थी  वहां हिंदूओं की जनसंख्या  5 करोड़ 40 लाख मे से 4 करोड़ 20 लाख हिंदू थे और पूर्वी बंगाल की कुल जनसंख्या 3 करोड़ 10 लाख मे से 2 करोड़ मुसलमान थे लेकिन देश मे हो रहे विकट आंदोलनो की वजह से 1911 मे इस विभाजन को रद्द कर दिया गया

मेरे ख्याल से यह विभाजन पूर्ण रुप से दो सम्प्रदायों एक विचारों और बंगाल की एकता पर कराड़ा प्रहार था जो एक इतिहास बन गया और यह केवल बंगाल का विभाजन नही था बल्कि एक पाकिस्तान बनाने का आइडिया था जिसे अंग्रेजों ने सुझाया था और आगे चल कर जिन्ना ने इसे वास्तविक रुप दिया । इससे आहत होकर गोपाल कृष्ण गोखले ने कहा था बंगाल विभाजन से अंग्रजों ने हमारे घाव पर नमक छिड़कने का काम किया है ।

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Rahul Tiwari

युवा पत्रकार

http://thenationfirst.in

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