खेल

आज अंतिम बार ब्लू जर्सी में नजर आयेंगे भारतीय गेंदबाजी के ‘संकटमोचक’ आशीष नेहरा

2003 विश्वकप का 30वाँ मैंच. स्थान किंग्समीड,डरबन का ऐतिहासिक ग्राउंड…भारत और इंग्लैंड के बीच का मैच जिसे जीतना दोनों टीम के लिए जरूरी था। भारत के तेजगेंदबाज आशीष नेहरा एड़ी के सूजन से बुरी तरह जूझ रहे थे,इतना ज्यादा कि जूता भी नहीं घुस रहा था। लेकिन फिर भी जब उन्हें मैच फिटनेस साबित करनें को कहा गया,तो नेहरा नें मना कर दिया। उन्होंने साफ कहा,कि चाहे कुछ भी हो जाए,वे खेलेंगे।

सूजे हुए पैर, दर्द को छुपाते हुए नेहरा का फिगर था, 10ओवर,2 मेडन, 23 रन और 6 विकेट।….. ठीक तेरह साल बाद 2016 टी-ट्वेंटी विश्वकप के सुपर टेन का मैच..बांग्लादेश के खिलाफ यह वर्चुअल क्वार्टरफाइनल था। बांग्लादेश को 147 रनों का पीछा करते हुए अंतिम तीन गेंद में जीत के लिए दो रन चाहिए थे, गेंदबाज हार्दिक पांड्या को कप्तान धोनी समझा रहे थे,लेकिन साथ में वे नेहरा हीं थे जिनकी सलाह से पांड्या नें अगली तीन गेंद पर एक भी रन नहीं बननें दिया।

नेहरा नें खुद चार ओवर में मात्र 29 रन देकर एक विकेट लिया। 2003 विश्वकप में जहाँ श्रीनाथ और जहीर की उपस्थिति में नेहरा नें एक साधारण से खास मुकाम बनाया तो 2016 में एक फिट खिलाड़ी के साथ साथ कोच की भूमिका में रहे। नेहरा आखिरी ओवर कर रहे हों,मैच का टेंशन वाला सिचुएशन हो, जब भी गेंद बैट्समैन को छकाती हुई कीपर के ग्लव्स में जाती है..नेहरा दोनों हाथ फैलाये हुए कीपर से गेंद इस तरह माँगते हैं,मानों आज रनआउट करके हीं दम लेंगे तब जबकि बैट्समैन रन लेनें की कोई कोशिश ना कर रहा हो। एक बैट्समैन के रूप में भी नेहरा सबसे अलग है।

नेहरा को गेंद करना बड़े बड़े गेंदबाजों के लिए टेढ़ी खीर साबित होती थी। ऐसा इसलिए नहीं कि नेहरा जबर्दस्त बैट्समैन थे,बल्कि इसलिए कि उनके खेलनें का तरीका सबसे यूनिक था। डिफेंस करते वक्त बैट को पूरी तरह जमीन में जमा दिया करते थें,मानों पैड पर गेंद लगनें हीं नहीं देना है। शान पोलाक की गेंद पर स्क्वायर कट मारनें से लेकर जैक कालिस को साइट स्क्रीन के सामनें छक्का मारनें तक जब भी नेहरा एक्शन में होते, मनोरंजन की भरपूर गारंटी थी। आशीष नेहरा पूरे करियर में चोटों से जूझते रहे लेकिन जब जब उन्हें मौका मिला,इस बाएँ हाथ के तेज गेंदबाज नें अपनी उपयोगिता बता दी। 1999 में डेब्यू के बाद अजहरुद्दीन से लेकर गांगुली,धोनी और अब कोहली की कप्तानी में खेल रहे हैं।

अपने पूरे क्रिकेट करियर में 12 सर्जरी के बाद अगर कोई तेज गेंदबाज देश की नेशनल टीम में है तो वह केवल और केवल आशीष नेहरा हीं हो सकते हैं। आज वही आशीष नेहरा आखिरी बार किसी इंटरनेशनल मैच में ब्लू जर्सी में नजर आयेंगे। बचपन में जहाँ से क्रिकेट शुरू किया था,आज वहीं उनके क्रिकेट करियर का अंत होगा…दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में जब भारत और न्यूजीलैंड की टीमें मैदान पर भिड़ेंगी तब माहौल भावनात्मक होगा, लोग नेहरा के क्रिकेट सफर को याद कर रहे होंगे…क्योंकि दिल्ली का यह लाल अपनें घर पर अपनी क्रिकेट किट को सदा के लिए खूँटी पर टाँग देगा।

अगर आप तेज गेंदबाजी के फैन हैं,तो आज शाम सात बजे टीवी सेट्स से चिपक कर बैठ जाइएगा,क्योंकि लेफ्ट आर्म बालिंग का वारियर आज आखिरी बार मैदान पर होगा। पिछले महीनें जब नेहरा नें अपनें आखिरी मैच का ऐलान किया था,तब उनके आवाज में एक दर्द था। दर्द इस बात का ,कि 38 39 साल का नेहरा जब पंद्रह सदस्यीय टीम में जगह बना सकता है,तो वह बेंच गर्म करनें का नहीं प्लेइंग इलेवन में खेलनें का हकदार है। नेहरा का कभी किसी पर आरोप लगानें, बहाना मारनें से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं रहा है। हमेशा रियलिटी में विश्वास रखनें वाले नेहरा मीडिया से कोसो दूर रहते हैं। ना तो वे फेसबुक यूज करते हैं और ना हीं ट्विटर इंस्टा जैसे वीवीआईपी प्लेटफार्म।

2011 विश्वकप में द. अफ्रीका के खिलाफ महँगे साबित होनें के बाद नेहरा को प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया। लेकिन कप्तान धौनी को पता था कि नेहरा कोहिनूर से तनिक कम नही हैं, तभी तो पाकिस्तान के खिलाफ हाई-वोल्टेज सेमीफाइनल में अश्विन की जगह नेहरा को मौका दिया गया। नेहरा नें दस ओवर में तैंतीस रन देकर दो बहुमूल्य विकेट लिए। फिगर उतनी सटीकता बयां नहीं कर रहे ,लेकिन हकीकत है कि उस मैच में जीत की पटकथा नेहरा ने हीं लिखी। दुर्भाग्यवश,उसी मैच में उनके हाथ का अँगूठा टूट गया और वो फाइनल नहीं खेल पाए।

लेकिन कुछ महीनें बाद जब वापस फिट हुए,तो उन्हें टीम में जगह हीं नहीं दी गई। उनका दर्द कभी दफा सामनें भी आया। नेहरा नें भी मान लिया कि अब उनका भारत के लिए दोबारा खेलनें का सपना सपना हीं रह जायेगा लेकिन थैंक्स आईपीएल और मेनी मोर थैंक्स चेन्नई सुपरकिंग के कप्तान महेंद्र सिंह धौनी का,जिन्होनें ‘ओल्ड बट गोल्ड’ आशीष नेहरा को लोगों के सामनें लाया। और वहीं से नेहरा नें न केवल भारतीय टी-ट्वेंटी टीम में कदम रखा,बल्कि अगले दो साल तक इस प्रारूप के सबसे सफल गेंदबाज रहे।

आज वही आशीष नेहरा टीम में होते हुए प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं ले पा रहे हैं…ऐसी स्थिति में नेहरा नें सन्यास का ऐलान कर सही समय पर सही फैसला किया है,अन्यथा वही होता जो सहवाग और हरभजन जैसे उनके टीम मेट्स के साथ हुआ। लेकिन मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद के गैरजिम्मेदाराना बयान से नेहरा जरूर आहत हुए होंगे। प्रसाद नें कहा था कि अपनें अंतिम मैंच में नेहरा प्लेइंग इलेवन में होंगे इस बात की कोई गारंटी नहीं है। पिछले तीन दशक में आशीष नेहरा एकमात्र ऐसे बालर रहे हैं,जिनसे आप पहले से लेकर 50वें ओवर तक कभी भी गेंद फेंकवा लो,वह विकेट निकाल कर देगा।

आज जबकि पेसर्स आक्रामकता को अपना हथियार बनाते हैं, नेहरा सटीक लाइन और लेंथ पर भरोसा रखते हैं। दोनों तरफ गेंद स्विंग करानें के उस्ताद नेहरा जी अपनें मजाकिया स्वभाव के कारण जानें जाते हैं। 17 टेस्ट में 44 विकेट, 120 वनडे में 157 विकेट और 25 टी-ट्वेंटी में 28 विकेट, आँकड़े कभी इस बात की ताकिद नहीं करते कि नेहरा कितनें अच्छे गेंदबाज रहे हैं। लेकिन हकीकत है कि नेहरा जैसा दूजा न कोई। भारतीय क्रिकेट अपनें इस कोहिनूर को बहुत मिस करेगा। जब जब टीम संकट में होगी, क्रिकेटप्रेमी नेहरा के ‘संकटमोचन’ वाली छवि को याद करेंगे। हालांकि धौनी इस बात को उजागर कर चुके हैं कि नेहरा एक अच्छे गेंदबाजी कोच साबित हो सकते हैं। नेहरा को भविष्य के लिए शुभकामनाएँ.

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Ankush Kumar Ashu
Alrounder, A pure Indian, Young Journalist, Sports lover, Sports and political commentator
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