जुर्म विचार

भारत की एक ऐसी प्रथा जिसके कारण रोज कई महिलाएं मौत को गले लगाती है

भारत एक ऐसा देश है जहां धर्म, संस्कृति और रीति-रिवाज का सबसे ज्यादा ख्याल रखा जाता है और इस रीति-रिवाज को नीभाने के चक्कर मे भारतीय समाज मे कुछ ऐसा हो जाता है जो इस समाज के लिए कई बार घातक सिद्ध होता है और फिर हम हाय तौबा करते रह जाते हैं और यह रीति-रिवाज खास तब बन जाती है जब यह स्त्री समुदाय से जुड़ा हो। एक तरफ तो हम अपने समाज मे स्त्री को देवी का स्थान देते हैं पुजनीय मानते है लेकिन जैसे ही किसी के घर मे लड़की का जन्म होता है तो न चाहते हुए भी हमारे मुख पर एक अलग सी मायुसी छा जाती है लेकिन कुछ ही ऐसे गिने चुने लोग होतें हैं जो वाकई मे खुश होते है ।

वैसे लोगों से मेरा एक ही सवाल है जो केवल लड़कों की चाहत ऱखते है । अपने घर मे पत्नी और बहु के साथ साथ आज कल एक गर्लफ्रेंड भी सब को चाहिए लेकिन कमाल की बात ये है कि उन्हें अपने घर मे बेटी नहीं चाहिए ऐसे लोग केवल मुझे ये बता दें कि आप को पत्नी और बहु के साथ साथ एक गर्लफ्रेंड कहां से मिलेगी । मेरा मानना है कि इस प्रकार के लोग जो एक तरफ तो खुद को शिक्षीत मानते हैं और दूसरी तरफ एक घटिया सोंच पाल कर रखते हैं तो फिर उन्हें इस समाज मे रहने  या पत्नी, बहु के साथ साथ एक गर्लफ्रेंड रखने का भी कोइ आधिकार नहीं है ।

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खैर वास्तविक मुद्दे पर आते है इस समाज मे ऐसे भी लोग हैं जिन्हें बेटी तो बिल्कुल नहीं चाहिए और उसके बाद जो पत्नी और बहु चाहिए वो मोटी रकम साथ लाई हो यानी उसके पिता या भाई  दहेजुआ पत्नी और बहु देने मे सक्षम हो और जो लोग दहेज कि मांग करते हैं वो इस बात को बखूबी जानते है कि अगर उनके पास भी बेटी है तो उन्हें भी दहेज देना है लेकिन फिर भी इसका विरोध किए बगैर दे देते है जबकि भारत मे दहेज देना या लेना अपराध है फिर भी वो दहेज का आदान प्रदान करते हैं । लेकिन आवाज नहीं उठा सकते क्योकि हमारे यहाँ आवाज उठाने के लिए तो एक स्पेशल आदमी चाहिए होता है वो आवाज उठाएगा तो हम भी पीछे पीछे चल देंगे इसी इंतजार में रहते है लेकिन क्या मजाल की कोइ आगे आएगा बस हमे तो पीछलगुआ बनना है |

SUICIDE

सबसे भयावह तो तब होता है जब दहेज को लेकर किसी महिला को डराया  धमकाया जाता और उससे भी अगर बात ना बने तो वो उसे मौत के घाट उतार देते हैं लेकिन वो भुल जाते हैं कि वो महिला जिसे वो मौत के घाट उतार चुके हैं वो उनके घर को बांध कर रखती है कुछ लोग यहां तक सोंच लेते हैं कि एक के जाने के बाद दूसरी आएगी वाकई मे ऐसे लोग दिलेर होते जो कानून को ताक पर रख कर ऐसे कारनामे करते  है उन्हें कानून का जरा सा भी भय नहीं होता है जबकि दहेज लेना देना या उसमे सहयोग करने पर भी 5 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है लेकिन लोग दहेज का लेन देन ऐसे करते हैं जैसे सरकार ने ही इन्हें लाईसेंस दे दिया हो की अगर तुम ने दहेज नही लिया तो 5 साल की सजा हो जाएगी ।

आप को बता दें कि भारत में हर वर्ष दहेज प्रताडना के कारण करीब 8000 मौतें होती हैं जिसमे हत्याएं और दबाव मे हुई आत्महत्या शामिल है और अगर इनकी हौसले की बात करें तो वो बुलंद इस लिए होतें है कि इस मामले मे 65 प्रतिशत को सजा नही होती है और वो किसी न किसी कारण से छुट जाते है  इनका छुटने या हौसला बुलंद होने के पीछे का कारण  है लचर कानून व्यवस्था जो बनाई तो गई है लेकिन केवल नाम के लिए, इस लिए कानून और समाज दोनो की सोच को बदलने की जरुरत है और इस प्रथा को रीति रिवाज से जोर कर देखना जब तक नहीं बंद किया जायेगा तब तक  इस समाज मे बेटी,पत्नी और बहु सुरक्षीत नहीं  हो पाएगी इसीलिएसोच बदलो देश बदलेगा।

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Rahul Tiwari
युवा पत्रकार
http://thenationfirst.in

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