इतिहास के पन्नों से

जब नेहरू ने ठुकरा दिया था गाँधी का ये प्रस्ताव

ब भारत अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहा था तब उसने कई ऐसे वीर योद्धा और सकारात्मक ऊर्जा से भरे नेताओं को खोया जिन्होंने देश की आजादी के लिए खुद को कुर्बान कर दिया लेकिन जब जिन्ना ने भारत विभाजन की मांग कर अलग पाकिस्तान बनाने की मांग पहली बार किया तो मानो ऐसा लग रहा था की व्यक्ति एक शरीर से काट के एक अंग की मांग कर रहा हो लेकिन इस बात से भी ज़्यादा भयावह था जब इस देश के नामी नेताओं ने भी जिन्ना की मनोकामना पूरा करने का संखनाद कर दिया ।

जब माउंटबेटन ने भारत विभाजन के लिए पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल ,मुहम्मद अली जिन्ना और महात्मा गांधी को चुना तब गांधी जी को छोड़ कर बाकी के सारे नेता चाहते थे कि भारत का विभाजन हो जाये । आखिर कोई अपनी राजनीतिक फायदा के लिए किस हद तक जा सकता है इस परिस्थिति को देखने के बाद मुझे नही लगता कि कुछ सोचने की भी ज़रूरत है ।

देश के संभावित विभाजन पर पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि हम इस रोज-रोज के दर्द से छुटकारा पाने के लिए हम सर कटाना उचित समझते हैं । अतः नेहरू ने मुहम्मद अली जिन्ना का साथ देते हुए देश के बटवारे पर अपनी मुहर लगा दी ।

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वही देश विभाजन को लेकर सरदार पटेल का मानना था कि विभाजन शब्द एक ऐसा नासूर बन चुका है जिसका इलाज तत्काल कर देने में ही हम सब की भलाई है अतः उस भाग की अलग कर देना ही उचित है और ऐसे बयानबाजी कर सरदार पटेल ने भी जिन्ना का साथ देना उचित समझा और उन्होंने भी विभाजन पर अपनी मुहर लगा दी ।

मेरी लास पर होगा भारत का विभाजन

लेकिन महात्मा गांधी देश विभाजन के खिलाफ शुरु से थे तभी जब माउंटबेटन ने इनसे देश विभाजन की बात कहा तब गांधी जी ने माउंटबेटेन को जवाब दिये थे कि अगर भारत का विभाजन होता है तो वो मेरे लास पर होगा । और फिर उन्होंने सुझाव दिया कि अंतरिम सरकार का अध्यक्ष जिन्ना को बना दिया जाए ताकि देश मे चल रहे संप्रदीयकतापूर्ण कत्लेआम को रोका जा सके लेकिन कांग्रेस तथा जिन्ना ने उनके इस मत को ठुकरा दिया और गांधी जी को इनके आगे झुकना पड़ा और अंत मे 3 जून 1947 को भारत पाक विभाजन योजना प्रस्तुत कर दी गई ।

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Rahul Tiwari

युवा पत्रकार

http://thenationfirst.in

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