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आपका यह एक कदम देश के GDP को 6 प्रतिशत तक बढा सकता है

GDP: महात्मा गांधी ने स्वच्छ भारत स्वास्थ्य भारत का सपना देखा था. उस समय से लेकर देश इस समस्या से जूझ रहा है हालांकि देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अभियान पर काफी जोर दिया है 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अभियान का पुनरूत्थान कर देश की जनता मे एक नया जोश भरने का काम किया जो शायद इस तरह के जोश के साथ देश का कोई भी नेता या पार्टी ने स्वच्छ भारत के सपने को सकार करने का प्रयास नही किया.

सरकारें बदलती रही लेकिन किसी भी सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट नही हुआ. लेकिन विगत 3 वर्षों में इस मिशन को इतना बल मिला है जो अपने आप मे अद्वितीय है. आजादी के 70 साल बाद ऐसा लग रहा है मानो सारी जनता आज ही स्वतंत्र हुई है और देश से गये अंग्रेजों के पद चिन्हों को मिटा कर गांधी के सपने को सकार करने के लिए सफाई कर रही हो और ऐसा मैं नही ये आंकड़े बात रहे है.

2011 के जनगणना के अनुसार भारत की कुल आबादी में से लगभग 70 प्रतिशत आबादी गांवों में बसती है लेकिन इस 70 प्रतिशत आबादी में से सिर्फ लगभग 33 प्रतिशत की आबादी ही शौचालय का इस्तेमाल करती थी और सफाई के प्रति जागरुक थी लेकिन पिछले मात्र 3 वर्षो में चौकाने वाले आंकड़े आये हैं ये आंकड़े अब 33 प्रतिशत से बढ़ कर 68 प्रतिशत हो गए हैं आजादी के 70 साल के इतिहास से अगर देखा जाए तो वाकई में यह कार्य अद्वितीय है क्योंकि स्वच्छ भारत अभियान को नरेंद्र मोदी ने 2014 में शुरुआत किया था तो महज 3 साल में इस आंकड़ो में दुगना से भी अधिक की बढ़ोतरी हई जो कि अपने आप मे यह असाधारण कार्य है सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, केरल, हरियाणा, और उत्तराखंड के गांवों को खुले में सौचमुक्त गांव घोषित कर दिया गया है.

वही गंगा किनारे बसने वाले 4 हजार गांवों को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया है और दरवाजा बंद जैसे ऐड चलाए जा रहे हैं लेकिन अभी भी देश मे कई ऐसे गांव हैं जो सौचालय में सौच करना अपनी शान के खिलाफ समझतें हैं उन्हें लगता है बाहर की गंदगी को घर मे क्यों रखना. लेकिन अगर वो ये जान लें कि खुले में सौच करना उनके लिए कितना नुकसान देह हैं तो शायद इस शान को त्याग कर स्वच्छता अभियान से खुद को जोर लें ।

विश्व बैंक के एक अध्ययन से पता चलता है कि भारत मे गंदगी के कारण 40 % बच्चों का शारीरिक मानसिक विकास रुक जाता है जिसका बोझ उनके परिवार के आर्थिक क्षमता पर पड़ता है जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 6 % से भी अधिक है देश को इस नुकसान से बचाने का एक ही रास्ता है स्वच्छता अभियान से खुद को जोर कर सौचालय का इस्तेमाल करना ताकि आप अपनी कमाई को सुरक्षित कर सकें. और देश के GDP में 6 % की वृधि दर्ज करवाने में योगदान दे सके.

वहीं अगर इस अभियान मे बात महिलाओं की योगदान की करें तो वो भी इस मिशन में पीछे नहीं हैं हालही में हुए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 6 हजार महिला सरपंचों को स्वच्छता मिशन में सफलता प्राप्त करने के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें स्वच्छता चैंपियंस के रूप में सम्मानित किया इस मिसन को पूरा करने का लक्ष्य 2019 तक रखा गया है जो कि सरकार और इस मिसन में शामिल लोगों के लिए अभी भी काफी चुनौती पूर्ण है इस लिए The Nation First की टीम सम्पूर्ण देशवासियों से आग्रह करता है कि इस सराहनीये कदम में सरकार के साथ चलकर अपनों को सुरक्षीत करें क्योंकि असली धन आप के अपने ही हैं .

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Rahul Tiwari

युवा पत्रकार

http://thenationfirst.in

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