कहानी

वीरान जिंदगी और हवस

arunuj_films_add

जीया.. ओ जीया बेटा! खिड़की किवाड़ लगा जल्दी बाहर भयंकर तूफान आ रहा है लग रहा है आज का दिन भी घर मे ही काटना पड़ेगा साला मन तो करता है ये पहाड़ी इलाका छोड़ कही मैदानी भाग में अपना घर बसाए लेकिन मन करने से क्या होता है… और वह पलंग पर लेट जाता है ये और कोई नही इस घर के मालिक रामोरहीम साहब है बहुत ही सख़्त मिजाज के हवस पुजारी है.

इस हवस पूजा के चक्कर में तो साहब ने 5-5 शादियाँ की लेकिन अपने सेक्स करने के अंदाज से सभी बीबियों को खो दिया अब बेचारे अकेले तन्हा खुद और बेचारी जिया जो इस बुढ़े बाप से अपने आप को बचाते हुए जवानी की दहलीज पर कदम रखती खूबसूरत परी की तरह जो एक बार देख ले मन ना डोले हो ही नही सकता लेकिन क्या करे बेचारी जीया इस काल कोठरी से बाहर जो नही निकल पाती हाँ कभी कभी घर से थोड़ी दूर पर एक झरना है वहां जाकर उस कल कल करते झरना को देखते हुए अक्सर यही सोचा करती है कि काश मैं भी झरना होता और कल कल करते अपने बहाव को यहीं कही पहाड़ी में छुपा लेता । लेकिन ऐसा भी होता है क्या ?

तूफान ख़तम हो चुका था और खाना भी! रामोरहीम साहब हाथ धोते हुए मैं बाहर निकल रहा हूँ कुछ जरूरी काम है तुम खाना खा कर सो जाना मुझे देर होगी आने में और हाँ घर से निकल ने की सोचना भी नहीं ठ$$$$……ठीक है बापू

रामोरहीम एक गुफ़ा में…. कितने एप्पल लाये हो। जी! सरकार पूरे दस है एक दम फ्रेश माल है एक अधेड़ उम्र के कश्मीरी आदमी के ज़बान से ये आवाजे निकल रही थी रामोरहिम आवाज़ भारी करके ठीक है ठीक है इसे सुबह दुबई के लिए रबाना करो सब इंतजाम हो गया है ना हाँ सरकार ! और हाँ सुनो केवल नौ एप्पल ही जाएगी एक एप्पल जो सबसे मीठा और स्वाद वाला हो उसे मेरे पास भजो जी जनाब ! ये कोई खाने वाला एप्पल नहीं है जैसा आप सोच रहें है ये कश्मीरी लड़कियों के सप्पलाई का कोड वर्ड है जो ये लोग यूज करते है जिससे कि किसी को पता न चले इन धंधा के बारे में । खैर…..

शर्मीली नाम थी उसकी एक दम अपने नाम की तरह शर्मीली वही कोई सोलह सत्रह की उम्र होगी एक दम कली की तरह लेकिन इस बेचारी को क्या मालूम कि इसकी जिन्दगी अब नरक बनने वाला है इस रामोरहीम के हाथों एक पल में ही सब कुछ लूट जाने वाला है अगले सुबह ये कली कली नही फूल बनने से पहले ही मुरझाने वाली है लेकिन वो तो ख्यालो में जी रही है वो अपने बिछुरे हुए पिता से जो मिलने वाली है वही पिता जो वर्षो पहले कहीं तूफान में गुम हो गया था पता नही वो जिंदा है भी या नही लेकिन शर्मीली को यहां लाने वाला तो यही कह लाया है कि पिता से मिलवाएगा बेचारी शर्मीली कितनी भोली है समझ जो नही पाती इन मक्कारो की बातों को.

रात गहरी हो चुकी थी लेकिन जीया करवटें बदल रही थी उसे नींद ही नही आ रही थी रात के अकेले में बस वह भागने की सोचते रहती थी भला सोचे भी क्यो नही वहां बाप हवस का नंगा नाच कर रहे हो और यहाँ बेटी को घर से निकलने तक का पाबन्द कौन बर्दास्त करेगी अरे जिंदगी में कोई मर्द न सही एक दो औरत भी मिल जाये तो थोरा मन बहल जाए लेकिन कहाँ ये तो एक सपना जैसा ही है

सुबह हो चुकी थी पहाड़ी कौआ राग अलाप रहा था तभी गेट पर दस्तक हुई कोई है कोई है लेकिन किसको पता था की ये एक दस्तक जीया की लाइफ बदल देगा आवाजे अभी भी आ रही थी कोई है का जीया कहाँ सुनने वाली थी उसे तो वहम लग रहा था लेकिन बार बार आवाज आने पर वह दरवाजे की ओर चल दी दरवाजा खोला एक गबरू नौजवान स्मार्ट चेहरा सांवली रंगत का ये लड़का देखने से शहरी लगता था

लेकिन जीया तो हूर थी सो वह गबरू तो एक पल तक जीया को देखता ही रह गया और अभी भी कुछ बोलने के अलावा बस बेतहासा घूरे जा रहा था तभी जीया ने शांति भंग करते हुए पूछा क्या चाहिए ज ज…जी आप क्या…?? वो मैं ये कह रहा था कि आप पहले अंदर बुलाए फिर बताता हूँ ? क्यो…??? मैं अंदर बुलाऊ आप को ? कौन है आप !? क्या चाहते है ? मैडम मैं यहां अपने दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने आया था लेकिन अब रास्ता भटक गया हूँ और मदद की आस में आपका दरवाजा खटखटाया है यहां दूर दूर तक तो और कोई घर भी नही है । जीया का सपना सच हो चुका था भगवान ने उसकी सुन ली थी अब उसे वीरान और अकेला पन से कुछ दिन या हमेशा के लिए ये नही पता लेकिन मुक्ति जरूर मिल चुकी थी ।

नकाबपोश

पुत्र रत्न

 

3,311 total views, 1 views today

Facebook Comments
Pushpam Savarn
A singer, web devloper, video editor, graphics designer, writer and columnist at TNF
http://thenationfirst.com

2 thoughts on “वीरान जिंदगी और हवस”

Leave a Reply