खेल जरा हट के

क्रिकेट इतिहास का वह एकमात्र मौका जब कपिल,गावस्कर और सचिन एक साथ मैदान पर थें

17 अक्टूबर 1987 का दिन भारतीय क्रिकेट टीम अपने से काफी कमजोर जिंबाब्वे से दो दो हाथ करने को तैयार थी| मौका था चौथे क्रिकेट विश्वकप के एक लीग मैच का, मुंबई का ऐतिहासिक वानखड़े स्टेडियम मैच की मेजबानी कर रहा था जिंबाब्वे इससे पहले न्यूजीलैड को टक्कर देने के बाद मात्र तीन रन से हारा था जबकि ऑस्ट्रेलिया से बुरी तरह से पीट गया|

भारत ऑस्ट्रेलिया से नजदीकी मैच में हार मिली थी जबकि न्यूजीलै्ड को 16 रन से हरा दिया था| लेकिन इन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पल मैदान में घटित होने वाला था जिसका अंदाजा कई वर्षो तक पूरे देश को नहीं हुआ,यहाँ तक की उस मैच में खेल रहे क्रिकेटरों को भी नहीं| बहरहाल ऐसा लगा कि दोनों कप्तान पिच को समझनें मेंं गलती कर बैठे | पिच में नमी थी और हरी घास भी छोड़ी गई थी| लेकिन कपिल देव नें अपनें अलावा सिर्फ मनोज प्रभाकर के रूप में दो पेसर्स के साथ उतरा वहीं जिम्बाब्वे के कप्तान जान ट्रेकोइस नें टॉस जीतकर पहले बैटिंग का हैरानीभरा फैसला ले लिया।

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भारतीय टीम मैदान पर अपनी जगह ले चुकी थी, जिम्बाब्वे के दोनों ओपनर आर्नोट और पैटरसन भी अपनी जगह खड़े थे। कपिल अपने बालिंग रनअप पर तैयार थे सुनील गावस्कर अपने फेवरेट पहली स्लिप पर पोजिशन ले चुके थे लेकिन इन सबके बीच बाउंड्री लाइन पर एक 14 साल का बच्चा खड़ा था बॉल ब्वॉय बनकर ,और वह बच्चा कोई और नहीं सचिन तेंडुलकर था। बाद में सचिन नें एक इंटरव्यू में बताया कि उनकी ड्यूटी इंडियन ड्रेसिंग रूम के पास मिली थी जिससे उन्हें कपिल,सन्नी पा,दिलीप वेंगसरकर,अजहरुद्दीन जैसे नामी क्रिकेटरों को करीब से देखने का मौका मिला।

यह भारतीय क्रिकेट में पहला और अंतिम मौका था जब ये तीन क्रिकेट लीजैंड एक साथ ग्राउंड में थे| सुनील गावस्कर और कपिल देव को तो अगले कई वर्षों तक इस बात का पता हीं नहीं चला कि जिस सचिन को वो देख रहे थे,वह कभी बॉल ब्वॉय की ड्यूटी में उन्हें खेलते देख चुका था|

बहरहाल मैच में मनोज प्रभाकर नें स्विंग गेंदबाजी का जबर्दस्त नमूना पेश करते हुए एक के बाद एक चार शिकार कर डाले| स्कोर था 13 पर 4 विकेट| एक तरफ एंडी पायक्राफ्ट क्रीज पर चट्टान बनें हुए थें लेकिन दूसरी तरफ उनके साथी पवेलियन लौट रहे थे| 99 पर 9 था जहाँ से एंडी नें जार्विस के साथ साझेदारी निभानी शुरू की| 135 का स्कोर था और एंडी 61 पर खेल रहे थे जब रवि शास्त्री नें उन्हें स्टंप कराकर मेहमानों को ऑलआउट कर दिया| मनोज प्रभाकर नें 19 रन पर चार विकेट लिए वहीं मनिंदर सिह नें अपनी फिरकी से 21 रन के एवज में जिंबाब्वे के तीन विकेट झटक डाले| 136 रन के मामूली लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीकांत(31) और गावस्कर(43) की जोड़ी नें अच्छी साझेदारी की| 76 रन पर जब पहला विकेट गिरा तो कप्तान कपिल नें एक आश्चर्यजनक फैसला कर नवजोत सिंह सिद्धू की जगह मनोज प्रभाकर को भेज दिया| मनोज नें 41 गेंदों पर नॉटआउट 11 रन की धीमी पारी खेली लेकिन दिलीप वेंगसरकर ने तेजतर्रार 46 रन बनाकर 133 गेंद बाकी रहते एक आसान जीत दिला दी|

भारत ने यह आठ विकेट से यह मैच जरूर जीता लेकिन इसे हमेशा इस बात के लिए याद किया जाता है जब एकमात्र बार कपिल,गावस्कर और सचिन किसी अंतर्राषट्रीय मैच में एक साथ मैदान पर दिखे| इसके बाद 1992 विश्वकप में सचिन और कपिल तो खेलें लेकिन सन्नी पा सन्यास ले चुके थे| इसके बाद यह त्रिमूर्ति कभी एक साथ मैदान पर नहीं दिखी |

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Ankush Kumar Ashu
Alrounder, A pure Indian, Young Journalist, Sports lover, Sports and political commentator
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