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पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थी की सेवा में लगे युवक से पाकिस्तानी हिन्दुओं की कहानी

पाकिस्तान से आए हिन्दू शरणार्थी की सेवा में लगे हरिओम साहू हमारे संस्कृति की वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को सही मायने में चरितार्थ कर रहे हैं। पहली बार फेसबुक पर हरिओम की तस्वीर मिली जिसमें वो कुछ छोटे बच्चो की मुस्कुराती टीम के साथ खड़े दिखाई दे रहे थें,खोजने पर पता चला कि हरिओम पाकिस्तान से आए हिन्दू शरणार्थी के साथ खड़े थें तथा उनके लिए दिल्ली के आदर्शनगर में एक सेवा कैंप चलाते हैं।वह विश्व हिन्दू परिषद के सदस्य हैं।

यहां पर प्रस्तुत है उनसे बातचीत की एक कड़ी

सवाल – आप पाकिस्तान से आए हिन्दू शरणार्थी के साथ कैसे जुड़े ?

जवाब – जहां ये लोग आज बसे हुए हैं वहीं पर मेरा आवास है,विहिप से जुड़े होने के कारण मुझे विहिप ने ही यह जिम्मेवारी सौंपी की मैं इनलोगों की देखभाल करूं जिसे 2013 से मैं निभा रहा हूं।

सवाल – सरकार क्या चाहती है इनके मुद्दे पर! और क्या इनके समूह को संयुक्त राष्ट्र संगठन की मानव शरणार्थी संगठन पहचान करती है?

जवाब – भारत सरकार का स्टैंड इनके मुद्दे पर अभी तक साफ नहीं है,मैं व्यक्तिगत तौर पर गृह मंत्री से भी मिल चुका हूं उन्होंने भी सिर्फ आश्वासन ही दिया है लेकिन एक बात जो मुझे सरकार से सॉफ्ट कॉर्नर के रूप में मिला है वह यह है कि सभी शरणार्थियों का वीजा आसानी से बढ़ा दिया जाता है रही संयुक्त राष्ट्र संघ की बात तो कभी हम लोगों ने उनसे संपर्क नहीं साधा अभी मैं व्यक्तिगत तौर पर स्वास्थ्य,स्वावलंबन,शिक्षा और इनके प्रगति पर फोकस कर रहा हूं।

सवाल – कितने शरणार्थी लोग हैं जिन्होंने यहां आश्रय लिया है तथा वह अपने जीविकोपार्जन के लिए क्या कार्य करते हैं?

जवाब – लगभग 500 के करीब शरणार्थी यहां आदर्श नगर दिल्ली में बसे हुए हैं जिनकी परिवार की संख् या कुल 80 है,ज्यादातर लोग व्यवसाय करते हैं,छोटे छोटे व्यवसाय जैसे की फुल भेजना ई रिक्शा चलाना,सस्ते इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचना इत्यादि

सवाल – पाकिस्तान छोड़ने की मूल वजह इनके अनुसार क्या थी?

जवाब – ज्यादातर लोग वहां पर शोषण के शिकार थे तथा इन्हें व्यक्तिगत तौर पर धार्मिक कार्यों को करने की आजादी नहीं थी जैसे कि खुलकर धर्म जागरण नहीं कर सकते,खुलकर पूजा नहीं कर सकते इत्यादि,ऐसे में जो लोग धार्मिक हैं वह कैसे जी पाएंगे आखिर विश्वास को आस्था को मानने की आजादी तो सब जगह होनी चाहिए,क्योंकि यह भी मानव अधिकार ही है।

सवाल – भारत में इनके साथ क्या समस्याएं हैं क्या आपको लगता है कि भारत सरकार इन्हें नागरिकता देगी ?

जवाब – अगर यह लोग 6 वर्ष से ज्यादा यहां बीता चुकेंगे तो इन्हें भारत की नागरिकता मिल सकती है जहां तक रही समस्या की बात तो उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या नहीं है ज्यादातर शरणार्थी भारत में रहकर खुश हैं और वह कहते हैं की एक वक्त की रोटी पर जिंदा रह सकता हूं लेकिन हिंदू बने रहकर।शरणार्थियों में जो बुजुर्ग लोग हैं वह धार्मिक स्थल घूमना चाहते हैं ये लोग बड़े ही आध्यात्मिक और धार्मिक हैं और ज्यादातर लोग सिंध के इलाके से हैं।

सवाल – कुछ दिन पहले सिंध वापस लौटे पाकिस्तानी हिंदुओं के बारे में आपकी क्या राय हैं ?

जवाब – जो पाकिस्तानी हिंदू भारत से वापस सिंध गए उनका धर्म परिवर्तन कर दिया गया। विश्व की मानव अधिकार संगठन के सामने यह सब हुआ लेकिन सब लोग खामोश हैं आखिर सभी बड़े मानवाधिकार संगठन चुप क्यों रहते हैं हिंदुओं के मुद्दे पर।उन्होंने पाकिस्तान के अंदर हो रहे जबरन धर्म परिवर्तन पर चुप्पी क्यों साध रखी है,यहां से गए हिंदू के पास कोई चारा नहीं था सिवाय चुपचाप धर्म परिवर्तन करने के और उन्होंने वही किया।

जब मैंने हरि ओम जी से रोहिंग्या के शरण देने पर और पाकिस्तानी हिन्दुओं को वापस भेजने पर सवाल किया तो उन्होंने बताया की हिंदुओं के पक्ष में बोलने वाले लोग कम हैं और मीडिया के लोगों में भी पाकिस्तान से आए हिंदू परिवार के लिए ज्यादा संवेदना नहीं रहा है वही रोहिंग्या पर मीडिया का रोल ज्यादा व्यापक है,कुछ लोग सोचते हैं कि रोहिंग्या पर बोलने से बाहर के कई देशों में उनका पहचान बनेगा और निजी स्वार्थ पूर्ति में फायदा मिलेगा,भारत में रोहिंग्या का मुद्दा तो पूरी तरीके से राजनीतिक मुद्दा बन चुका है,धार्मिक तौर पर रोहिंग्या का ताल्लुक भारत में अल्पसंख्यक वर्ग से है इसीलिए तुष्टिकरण की राजनीति के तहत उनकी नागरिकता उन्हें आसानी से मिल जाती है।

सवाल – क्या पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिंदुओं की दयनीय स्थिति को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने किसी अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के सामने इस मुद्दे को रखा है ?

जवाब – इस बारे में उन्हें कोई विशेष जानकारी नहीं है लेकिन वह व्यक्तिगत तौर पर कुछ लोगों से मिले हैं जिनका संबंध मानवाधिकार संगठन से है।

जाते जाते हरि ओम जी ने मुझे यह भी बताया की जो भी पाकिस्तान से हिंदू शरणार्थी भारत में टीम में आते हैं वह उन्हें आने के बाद पाकिस्तान के रुपए उनके हाथ में रखकर यह गुजारिश करते हैं कि आप हमारे लिए जागरण की व्यवस्था करें ताकि हम लोग जिंदगी में पहली बार खुलकर अपनी भक्ति और अपनी आस्था को आंखों के सामने हृदय से महसूस कर सकूं,उन्होंने आगे यह भी बताया की शरणार्थियों ने कई बार पाकिस्तान में रहते हुए बीसीसीआई को चिट्ठी लिखा और उन से गुजारिश की कि भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच न खेले जाएं क्योंकि अगर पाकिस्तान हारता है तो उनके घरों को तबाही का मंजर देखना पड़ता है।

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Rajan Bhardwaj
Traveller,Deep interest in social-political-economical aspect of indian society, use to keep eye on international relationship. Spiritual by heart and soul.
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